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ग़ज़ल - सीख

मौसिकी के सब तरीके आजमाना सीख लो । गर सुकूँ की चाह है तो गीत गाना सीख लो ।। साथ पाने को किसी का क्यों परेशां हो रहे , यार तुम भी जिंदगी तन्हा बिताना सीख लो ।। चाहिए कुछ भी नहीं बस हाल दिल का जानने ,  सिर्फ दुखती नब्ज़ हौले से दबाना सीख लो ।। दौर आएगा जहाँ से जीत पाने के लिए , दाँव पर रिश्ते लगेंगे हार जाना सीख लो ।। क्या भरोसा कल नयी आफत खड़ी हो दूसरी , आज से ही आदतें अच्छी बनाना सीख लो ।। ✍️ आशीष हरीराम नेमा ©aashish_hr_nema

ग़ज़ल - वास्ता

व़ज़्न -  1222 1222 1222 1222 न दरबारी वजीरों से न ही छोटे सिपाही से । फकीरों के जुड़े है तार सीधे बादशाही से ।। बहा के अश्क़ हमदर्दी जता देना दिखावा है , असल मतलब है' इनको सिर्फ अपनी वाहवाही से ।। खुदा की रहमतों वाली अदालत है बड़ी सबसे , जहाँ पर फैसले होते नहीं झूठी गवाही से ।। अगर यूँ ही चली हर बार मनमर्जी तुम्हारी ही , पड़ेगा फर्क क्या बोलो मिरी हामी मनाही से ।। चलें जो तान के सीना सरापा तन सफेदी में , सियासतदार वे सब खौफ खाते है सियाही से ।। अभी के शोर से दुगुनी फकत खामोशियाँ होंगी , नया आगाज जब होगा कयामत की तबाही से ।। बिना दीदार के जो इश्क़ को बेरंग कहते हैं , वे' शायद वास्ता रखते नहीं इश्क़ेइलाही से ।। ✍️ आशीष हरीराम नेमा ©aashish_hr_nema